हर तरह के लोग मिलेंगे सफर-ए-जिंदगी में दोस्त
हर कोई एक सा न होगा, कोई भी मुझसा न होगा
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भले साथ न चलो ज़ालिम दुनिया की नज़रों में
तुम सही मायनों में साथ छोड़ भी न पाओगी
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राही मिले हमें सभी मंजिल-पूर्व ही साथ छोड़ जाने वाले
कोई दोस्त ग़लत था, किसी के प्यार के पैमाने अजीब थे
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हर क़दम साथ चलते हैं आज भी तेरे साये
तुम तो चले गए यार मगर बहुत याद आये
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विकास प्रताप सिंह 'हितैषी'
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हर कोई एक सा न होगा, कोई भी मुझसा न होगा
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भले साथ न चलो ज़ालिम दुनिया की नज़रों में
तुम सही मायनों में साथ छोड़ भी न पाओगी
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राही मिले हमें सभी मंजिल-पूर्व ही साथ छोड़ जाने वाले
कोई दोस्त ग़लत था, किसी के प्यार के पैमाने अजीब थे
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हर क़दम साथ चलते हैं आज भी तेरे साये
तुम तो चले गए यार मगर बहुत याद आये
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