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Sunday, September 9, 2012

हर जुमले का आधार है

चलते-२ यूँ ही विचार कौंधा आज एक
क्या होता कुछ भी कभी निर्मूल है?
हर जुमले का आधार है कहीं न कहीं
कभी अनुकूल है, कभी प्रतिकूल है|
श्रेष्ठ उदाहरण इस प्रकृति का - भरे
यौवन में ही डाली से टपकता फूल है ||

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विकास प्रताप सिंह 'हितैषी'
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