सुरमई साँझ के साये में
तेरी आँखों से टकराना है
इस १ पल के आँचल में ही
प्रेम सुमन खिलाना है |
मिलन यामिनी हो न हो
ये शाम प्यार के नाम है
इन लम्हों की चादर में
एक दूजे में खो जाना है
उम्र छोटी मगर इश्क हमें
सदियों का निभाना प्रिये!
अब संग तेरे जी लेना है
संग तेरे मर जाना है ||
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विकास प्रताप सिंह 'हितैषी'
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