हो क़ैद सकता नहीं आइना पूरा
तस्वीरों में... तेरी झलक का
कयास ही लगा सकता हूँ होगा कैसा
दिव्य तासीर.. हर तेरी खनक का
मिलना अपना हो जब भी! पल वो
होगा आशना.. तेरी महक का
बाद फिर मेरा ही तू, सुन ले जहां
तू चाहे हो दीन.. या रनक का
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विकास प्रताप सिंह 'हितैषी'

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