MyFreeCopyright.com Registered & Protected

Tuesday, June 12, 2012

खनक


हो क़ैद सकता नहीं आइना पूरा 
तस्वीरों में... तेरी झलक का 
कयास ही लगा सकता हूँ होगा कैसा
दिव्य तासीर.. हर तेरी खनक का 

मिलना अपना हो जब भी! पल वो 
होगा आशना.. तेरी महक का 
बाद फिर मेरा ही तू, सुन ले जहां 
तू चाहे हो दीन.. या रनक का 

--
विकास प्रताप सिंह 'हितैषी'

No comments:

Post a Comment