'हितैषी'
:)
Saturday, June 9, 2012
ज़िन्दगी रुक सी गयी है
विचलित मन है दिनों-दिन
ज़िन्दगी रुक सी गयी है
हृदय में उल्लास की हर
एक शाख सूख सी गयी है
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विकास प्रताप सिंह
'हितैषी'
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28/05/2012
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