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Tuesday, June 19, 2012

उड़ के पास तेरे पहुँच जाऊं

आता होगा हवा का झोंका 
छूके मुझे तेरी छतो पर
शबनम भेजी है मैने तेरी ओर 
एक पंछी के परों पर|

गुदगुदाने, हंसाने तुझे 
पवन मदमस्त हो आती होगी
चहकती तेरे पास में चिड़िया 
गीत मेरा सुनाती होगी|

ज़ाफरानी रंग आसमानों का 
संग तेरे देखना चाहा है
हरकतें मस्तानी तेरी सहेजने 
बुलबुल ने मुझे बुलाया है|

चाह मेरी भी इसी वक़्त 
उड़ के पास तेरे पहुँच जाऊं 
तेरी शोखियाँ, मुख्तसर सही!
मैं सामने से देख पाऊँ ||

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विकास प्रताप सिंह 'हितैषी'



(18/06/2012)
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