MyFreeCopyright.com Registered & Protected

Monday, July 16, 2012

लिखूं आज क्या!


कशमकश में हूँ मैं 
लिखूं आज क्या!

किस पीर को साज़ चढ़ाऊँ!
किस दर्द को आवाज़ बनाऊं!
ज़ख्म पुराने जी के फिर
सिलूँ आज क्या!

किस जश्न को ताज पहनाऊँ!
किस ख़ुशी में नाचूं, गाऊँ!
आनंद उड़ाता हर पल में 
फिरूं आज क्या!

या किसी गीत से उमंग जगाऊँ!
कोई बिसरी सुर-तरंग बुलाऊँ!
परवाज़ चढ़ाता इस मस्ती में
डूबूं आज क्या!

नाच मेह में हदें भुलाऊँ!
धनुष-इन्द्र को तीर पकडाऊँ!
मलिन-मन धुलाता, इस अम्बर को 
चूमूं आज क्या!

शुआओं की रंगीनियाँ परवान चढ़ाऊँ!
खलाओं में सपने सुनहरे सजाऊँ!
भटकते मन का ख़त्म हो
इंतज़ार आज क्या!

कुछ कशमकश में हूँ
लिखूं आज क्या!

--
विकास प्रताप सिंह 'हितैषी'

No comments:

Post a Comment