चल पूछ आदमी से तू यह प्रश्न गिलहरी
वो घर तेरा ज़मीं से उखाड़ता क्यों है!
...
वो ज़ख्म तेरे भरे हुए उभारता क्यों है!
बेहद थक गया हूँ मुझे जी भर सो लेने दो
सवेरा रौशनी को फलक से उतारता क्यों है!
तू ही गया था कल कर छोड़ कर मेरा
अब नाम मेरा घडी-२ पुकारता क्यों है!
श्रम के निरंतर युद्धवीर को भी सलाम मिले
आरती केवल धर्मजीत की उतारता क्यों है!
इंसां वो समाज-भलाई हित करे जो रोज कर्म
स्तुति नित सिर्फ ईश की उचारता क्यों है!
प्रहार कर
बिगाड़ता क्यों है!

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