तलब-ए-जिंदगी रही नहीं दीदार-ए-हुस्न के बाद
इश्क के नज़राने में अब वो मेरी जां ही ले ले
--
विकास प्रताप सिंह 'हितैषी'
शबाब-ए-हुस्न को न यूं ज़ाया करो
रोज़ चाँद की शक्ल में सामने आया करो
तुम ही तो हो जीवन-साथी यादों की
कस्तूरी बन मेरी साँसों में समाया करो
--
विकास प्रताप सिंह 'हितैषी'
जंगलों के नाम पर जो खाली मैदां हैं,
करता रहेगा मानव कब तक ऐसी भूल?
उद्यान तो रहे नहीं अब सुमन सौरभ को,
जीवन की हर संध्या बस 'कागज़ का फूल'
--
विकास प्रताप सिंह 'हितैषी'
दर्द-ए-जिगर आँखों से बहे
दिल की हर पीर ज़ुबाँ पे रहे
है गर यही किस्मत को मंज़ूर
तो किसी और के दर पे जाए
ढह जाये जो सैलाब में
साहिल की वो रेत नहीं हम
इश्क की पतवार से समंदर चखा है
इतनी आसानी से कैसे डूब जायें!
--
'हितैषी'
आवाजें चोट देती हैं अतीत की
पुराना वक्त भूलता नहीं
नया सितारा मिलता नहीं
कमज़ोर है नफ़स* नसीब की
--
'हितैषी'
*नफ़स = breath
आज 'रोमांस किंग' यश चोपड़ा जी के गुज़र जाने पर उनको भाव-भीनी श्रद्धांजलि देती निम्न पंक्तियाँ --/>
========
मरण तो सुनिश्चित है!
प्राण आज भी अचंभित हैं
जीवन-सागर के गागर में
सुख-दुःख-'यश' आमंत्रित हैं
--
हितैषी
चाहतों के रंग से
आकृति उकेरी है
दिल के बादलों ने
इश्क के आसमान पर
और अकेली तुम भी
नहीं फबतीं शाख पर
आओ परों को फैलाएँ
निकलें संग उड़ान पर
--
'हितैषी'
अभिवादन दुश्मन का भी जो सामने तो आये
वार करते हैं बुझदिल कुछ पीछे से छुप-२ के
--
'हितैषी'
तेरी यादों के चलचित्र भला बंद करूं कैसे!
ये जाग उठते हैं अक्सर मेरे सोने के बाद
--
'हितैषी'
सुबह से शाम तक अब बस चलना याद है
किसी ने कहा था कभी "मत देखना मुडके"
--
'हितैषी'
फासले रखो यारों दरम्यां
आँखों और दिल के बीच
देखते ही मेरे यार को
धडकन रुक भी सकती है
आंखें झुक भी सकती हैं
--
'हितैषी'
इश्क के नज़राने में अब वो मेरी जां ही ले ले
--
विकास प्रताप सिंह 'हितैषी'
शबाब-ए-हुस्न को न यूं ज़ाया करो
रोज़ चाँद की शक्ल में सामने आया करो
तुम ही तो हो जीवन-साथी यादों की
कस्तूरी बन मेरी साँसों में समाया करो
--
विकास प्रताप सिंह 'हितैषी'
जंगलों के नाम पर जो खाली मैदां हैं,
करता रहेगा मानव कब तक ऐसी भूल?
उद्यान तो रहे नहीं अब सुमन सौरभ को,
जीवन की हर संध्या बस 'कागज़ का फूल'
--
विकास प्रताप सिंह 'हितैषी'
दर्द-ए-जिगर आँखों से बहे
दिल की हर पीर ज़ुबाँ पे रहे
है गर यही किस्मत को मंज़ूर
तो किसी और के दर पे जाए
ढह जाये जो सैलाब में
साहिल की वो रेत नहीं हम
इश्क की पतवार से समंदर चखा है
इतनी आसानी से कैसे डूब जायें!
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'हितैषी'
आवाजें चोट देती हैं अतीत की
पुराना वक्त भूलता नहीं
नया सितारा मिलता नहीं
कमज़ोर है नफ़स* नसीब की
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'हितैषी'
*नफ़स = breath
आज 'रोमांस किंग' यश चोपड़ा जी के गुज़र जाने पर उनको भाव-भीनी श्रद्धांजलि देती निम्न पंक्तियाँ --/>
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मरण तो सुनिश्चित है!
प्राण आज भी अचंभित हैं
जीवन-सागर के गागर में
सुख-दुःख-'यश' आमंत्रित हैं
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हितैषी
चाहतों के रंग से
आकृति उकेरी है
दिल के बादलों ने
इश्क के आसमान पर
और अकेली तुम भी
नहीं फबतीं शाख पर
आओ परों को फैलाएँ
निकलें संग उड़ान पर
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'हितैषी'
अभिवादन दुश्मन का भी जो सामने तो आये
वार करते हैं बुझदिल कुछ पीछे से छुप-२ के
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'हितैषी'
तेरी यादों के चलचित्र भला बंद करूं कैसे!
ये जाग उठते हैं अक्सर मेरे सोने के बाद
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'हितैषी'
सुबह से शाम तक अब बस चलना याद है
किसी ने कहा था कभी "मत देखना मुडके"
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'हितैषी'
फासले रखो यारों दरम्यां
आँखों और दिल के बीच
देखते ही मेरे यार को
धडकन रुक भी सकती है
आंखें झुक भी सकती हैं
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'हितैषी'

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