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Tuesday, October 23, 2012

एक कहानी रूठी मुझसे


शाम हुई तो बात बनी तू 
निशा होते विश्राम बनी है 
पर सुबह प्रथम किरण से
क्यूँ तू है फिर छूटी मुझसे?
एक कहानी रूठी मुझसे!

स्मरण तेरा प्रतिपल करने को 
समय दिवा में पास कहाँ!
हर संध्या भी तेरी भंगिमा
किन्तु अब है टूटी मुझसे
एक कहानी रूठी मुझसे|

न मानूं कोई अपराध हुआ हो!
या कभी किसी और से
मुझको ऐसा प्यार हुआ हो!
क्यूँ वार किया ऐसा फिर, देव!
प्रत्येक निशानी लूटी मुझसे?

मेरी...
प्रेम कहानी रूठी मुझसे||

--
विकास प्रताप सिंह 'हितैषी'

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