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Saturday, October 13, 2012

sher

तेरी याद और दिल उदास हो जाता है 
दूर होके भी तू फिर पास हो जाता है 
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विकास प्रताप सिंह 'हितैषी'


jab dil hi toot gaya... hum soke kya karenge!

jo h nahi, uske sapnon me khoke kya karenge!

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अब इसे सुनने के बाद चुप सोयें तो कैसे!

दर्द उफन आ रहा है, दिल लिखे जा रहा है

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दिल उदास है...
नहीं पास कोई खास है

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विकास प्रताप सिंह 'हितैषी'


कभी हम सिकंदर... कभी तुम धुरंधर...
और भी काम हैं दुनिया में जलने के सिवा 
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विकास प्रताप सिंह 'हितैषी'

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