जितने किस्से दफ़न हैं तेरे, इस सीने में
हर एक को कोहिनूर कहें, तू इतना प्यारा है
सुनो! ऐसा नहीं कि है दिल मेरा आवारा
दरिया की हों कितनी भी लहरें, तू ही किनारा है
अब इतना तो हक़ हमें भी दो, तारीफ़ करें
खुदा ने भी क्या खूब फ़लक से चाँद उतारा है!
हर मोड़ पे गम देकर इतराती रही जिंदगी
हर एक को कोहिनूर कहें, तू इतना प्यारा है
सुनो! ऐसा नहीं कि है दिल मेरा आवारा
दरिया की हों कितनी भी लहरें, तू ही किनारा है
अब इतना तो हक़ हमें भी दो, तारीफ़ करें
खुदा ने भी क्या खूब फ़लक से चाँद उतारा है!
हर मोड़ पे गम देकर इतराती रही जिंदगी
दिल के ज़ख्म ने हँसी को हर बार निखारा है
इठलाते रहे वो ग़ैर के हाथों में हाथ देकर
हमें पता न था मृग-तृष्णा संसार हमारा है
--
विकास प्रताप सिंह 'हितैषी'
इठलाते रहे वो ग़ैर के हाथों में हाथ देकर
हमें पता न था मृग-तृष्णा संसार हमारा है
--
विकास प्रताप सिंह 'हितैषी'

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