आकुल है उर्वी आज अम्बर संग धड़कने को
व्याकुल है व्योम की श्वास खुल के बरसने को
--
'हितैषी'
(27 अक्टूबर 2012)
मस्तक इंसानियत का और नीचे गिरा दिया
धर्म की वेदी पर कल फिर एक निर्दोष चढ़ा दिया
आपसी हँसी-मिलाप थी मिठास दीवाली-ईद की
मतभेदों ने त्योहारों पर खून का घूँट पिला दिया
--
'हितैषी'
(27 अक्टूबर 2012)
act apt to your interests, lead life better
simply looking forward does not matter
--
'warrior'
(27 अक्टूबर 2012)
भाषा में साहित्य का विशाल डील-डौल है
जीवन-दर्शन का अदम्य सत्यापित माहौल है
--
'हितैषी'
(28 अक्टूबर 2012)
डील-डौल = stature
न हिंदू, न सिख, न ईसाई, न मुसलमान बनाना तू
यदि तू है, सर्वप्रथम मुझे नेक इंसान बनाना तू ||
--
'हितैषी'
(28 अक्टूबर 2012)
[[न हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, पारसी बनाना तू
अंतर्चक्षु बन डग भर सकूं, वह आरसी बनाना तू ]]
व्याकुल है व्योम की श्वास खुल के बरसने को
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'हितैषी'
(27 अक्टूबर 2012)
मस्तक इंसानियत का और नीचे गिरा दिया
धर्म की वेदी पर कल फिर एक निर्दोष चढ़ा दिया
आपसी हँसी-मिलाप थी मिठास दीवाली-ईद की
मतभेदों ने त्योहारों पर खून का घूँट पिला दिया
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'हितैषी'
(27 अक्टूबर 2012)
act apt to your interests, lead life better
simply looking forward does not matter
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'warrior'
(27 अक्टूबर 2012)
भाषा में साहित्य का विशाल डील-डौल है
जीवन-दर्शन का अदम्य सत्यापित माहौल है
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'हितैषी'
(28 अक्टूबर 2012)
डील-डौल = stature
न हिंदू, न सिख, न ईसाई, न मुसलमान बनाना तू
यदि तू है, सर्वप्रथम मुझे नेक इंसान बनाना तू ||
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'हितैषी'
(28 अक्टूबर 2012)
[[न हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, पारसी बनाना तू
अंतर्चक्षु बन डग भर सकूं, वह आरसी बनाना तू ]]

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