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Sunday, November 18, 2012

कुछ और अशार

आकुल है उर्वी आज अम्बर संग धड़कने को 
व्याकुल है व्योम की श्वास खुल के बरसने को 
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'हितैषी'
(27 अक्टूबर 2012)


मस्तक इंसानियत का और नीचे गिरा दिया 
धर्म की वेदी पर कल फिर एक निर्दोष चढ़ा दिया 
आपसी हँसी-मिलाप थी मिठास दीवाली-ईद की 
मतभेदों ने त्योहारों पर खून का घूँट पिला दिया 
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'हितैषी'
(27 अक्टूबर 2012)


act apt to your interests, lead life better 
simply looking forward does not matter
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'warrior'
(27 अक्टूबर 2012)


भाषा में साहित्य का विशाल डील-डौल है 
जीवन-दर्शन का अदम्य सत्यापित माहौल है 
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'हितैषी'
(28 अक्टूबर 2012)
डील-डौल = stature


न हिंदू, न सिख, न ईसाई, न मुसलमान बनाना तू 
यदि तू है, सर्वप्रथम मुझे नेक इंसान बनाना तू ||
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'हितैषी'
(28 अक्टूबर 2012)


[[न हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, पारसी बनाना तू

अंतर्चक्षु बन डग भर सकूं, वह आरसी बनाना तू ;)]]




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