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Sunday, March 31, 2013

तेरा मुखड़ा चाँद का टुकड़ा

तेरा मुखड़ा चाँद का टुकड़ा 
नयन तारे झिलमिलाते 
वाणी जैसे वीणा की तान
दर्पण लजाए जो तू मुस्का दे 

तेरे बिखरे लटों की उलझन 
अंगुलियों के जासूस सुलझाते
पलकें निमिष जातीं जब 
सैंकड़ों पुष्प झर-झर जाते 

ओंठ मधु भुवन जीवंत
तृष्णा और समीप बुलाते
रति, उर्वशी, मेनका भी
तेरे आगे शीश झुकाते

--
'हितैषी'


for my unreal love Dipika Pallikal 

(12/12/12)

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