तेरा मुखड़ा चाँद का टुकड़ा
नयन तारे झिलमिलाते
वाणी जैसे वीणा की तान
दर्पण लजाए जो तू मुस्का दे
तेरे बिखरे लटों की उलझन
अंगुलियों के जासूस सुलझाते
पलकें निमिष जातीं जब
सैंकड़ों पुष्प झर-झर जाते
ओंठ मधु भुवन जीवंत
तृष्णा और समीप बुलाते
रति, उर्वशी, मेनका भी
तेरे आगे शीश झुकाते
--
'हितैषी'
for my unreal love Dipika Pallikal
(12/12/12)
नयन तारे झिलमिलाते
वाणी जैसे वीणा की तान
दर्पण लजाए जो तू मुस्का दे
तेरे बिखरे लटों की उलझन
अंगुलियों के जासूस सुलझाते
पलकें निमिष जातीं जब
सैंकड़ों पुष्प झर-झर जाते
ओंठ मधु भुवन जीवंत
तृष्णा और समीप बुलाते
रति, उर्वशी, मेनका भी
तेरे आगे शीश झुकाते
--
'हितैषी'
for my unreal love Dipika Pallikal
(12/12/12)

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