तेरे माथे की बिंदी के दीदार में चहके हैं
'कब आएगी बहार!' इंतज़ार में बहके हैं
हो उर्वशी तुम! हम ये कहेंगे, वो करेंगे!
सच! बरसों से इसी किरदार में बैठे हैं
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विकास प्रताप सिंह 'हितैषी'
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