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Saturday, October 27, 2012

आज का दशहरा


दशहरा के अवसर पर आज के वक्त की रावण लीला की कुछ झलकियाँ पेश हैं --/>कटाक्ष/व्यंग्य --/> I hope u'll like it   
बड़ी शिद्दत से जलायेंगे रावण इस बार भी
अहंकार के दशानन को खत्म न होने देंगे

कहते ही रहेंगे 'सब भ्रष्ट हैं इस देश में'
खुद के ज़मीर को कोई फर्क न पड़ने देंगे

दशहरा है सो मनाओ खुशी से महोत्सव
मज़हब के नाम पर तो बैर चलते रहेंगे

अधर्म पर धर्म की जीत का हर बार सा होगा जश्न
मक्कारी और लूट राष्ट्र में फिर भी चलने देंगे

खबर है कुम्भकर्ण भी सोयेगा फिर राख में
छुट्टी है, आँख-कान पे पर्दा डाल हम भी सोते होंगे

प्रभु-भक्त ही बचा था शत्रु पक्ष से राम-युद्ध में
कलियुग है ये, कहाँ विभीषण अब होते होंगे!

था मेघनाद इन्द्रजीत, जनशत्रु था पर, मारा गया
नहीं कोई इन्द्रिय-जीत अब, बस महिलागण सब भुगतेंगे 

भस्म हो ही जाने हैं संध्याकाल पुतले तीनों दैत्यों के 
लेकिन भीतर पलते रावण को सब सुरक्षित रखेंगे 

--
'हितैषी'

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