MyFreeCopyright.com Registered & Protected

Saturday, October 27, 2012

काले साये हैं बीते जीवन के कहीं ऐसे मुझमें शामिल 
लबों से कुछ और कहते हैं, पर आँखों से निर्झर बहते हैं 
--
'हितैषी'


सुना है उनके दीदार को दीवाने हज़ार जान छिड़कते हैं 
तो उनकी मुस्कान पर मेरा भी ज़खीरा-ए-अरमां क़ुर्बान
--
'हितैषी'


अब तेरे संग के चंद लम्हे न सही, यादों की बारात है 
आज की शब सितारों की नहीं, जुगनुओं की रात है 
--
'हितैषी'


याचिका दायर कर दी तेरे दिल की कचहरी में 
दस्तक की घूस भी ले ली है मौसम प्रहरी ने 
वैध सूचना चाहिए अब तेरे हाँ या ना की 
एक श्वास गहरी ले प्रेम अनुग्रह स्वीकृति दे 
--
'हितैषी'


कैसा नशा किया है मुझ पर तूने ज़िंदगी! 
मैं दिल की निगाहों से जन्नत जी लेता हूँ 
--
'हितैषी'



No comments:

Post a Comment