इतना मुश्किल भी नहीं दुनियादारी का गणित
सामाजिक हल निकल सके वो किताब चाहिए
सफर के सवालों से हुए हम हर पग चकित
गंतव्य तक पहुंचा सके ऐसा जवाब चाहिए
काम के प्रकोप में कहे 'अपनी' से आदम भ्रमित
"औरत के चेहरे पर कुछ तो नकाब चाहिए!"
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विकास प्रताप सिंह 'हितैषी'
सामाजिक हल निकल सके वो किताब चाहिए
सफर के सवालों से हुए हम हर पग चकित
गंतव्य तक पहुंचा सके ऐसा जवाब चाहिए
काम के प्रकोप में कहे 'अपनी' से आदम भ्रमित
"औरत के चेहरे पर कुछ तो नकाब चाहिए!"
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विकास प्रताप सिंह 'हितैषी'

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