तमाम रात साथ जागते हैं दोनों मगर,
दुनिया उसे चाँद मुझे आवारा कहती है ! <---> 'मेरे हृदय स्पंद' (पृष्ठ)
संग उभरते हैं रात भर सौ करोड़ मोती, दुनिया
मेरी आँखों में आँसू, आसमां में तारा कहती है <---> 'हितैषी'
(01 नवम्बर 2012)
दुनिया उसे चाँद मुझे आवारा कहती है ! <---> 'मेरे हृदय स्पंद' (पृष्ठ)
संग उभरते हैं रात भर सौ करोड़ मोती, दुनिया
मेरी आँखों में आँसू, आसमां में तारा कहती है <---> 'हितैषी'
(01 नवम्बर 2012)

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