लोग दूर जाके पास आते भी हैं
कुछ फ़ासले दूरी घटाते भी हैं
इश्क में दिल सिर्फ प्यार नहीं करते
ये पंछी गुनगुनाते भी हैं
--
'हितैषी
(02 नवम्बर 2012)
बड़ी देर तक सोये रहे यूं ख्वाबों में अरमां मेरे
हकीक़तन तुम आये, नींदों में खलबली मची है
--
'हितैषी'
खलबली = panic
(03 नवम्बर 2012)
ज़िन्दगी खाली रास्तों से गुज़रती क्यों है!
बाद किसी के मिलने के ही बिखरती क्यों है!
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'हितैषी'
(03 नवम्बर 2012)
कुछ फ़ासले दूरी घटाते भी हैं
इश्क में दिल सिर्फ प्यार नहीं करते
ये पंछी गुनगुनाते भी हैं
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'हितैषी
(02 नवम्बर 2012)
बड़ी देर तक सोये रहे यूं ख्वाबों में अरमां मेरे
हकीक़तन तुम आये, नींदों में खलबली मची है
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'हितैषी'
खलबली = panic
(03 नवम्बर 2012)
ज़िन्दगी खाली रास्तों से गुज़रती क्यों है!
बाद किसी के मिलने के ही बिखरती क्यों है!
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'हितैषी'
(03 नवम्बर 2012)

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