MyFreeCopyright.com Registered & Protected

Sunday, November 18, 2012

फूलों से दिल लगाया

फूलों से दिल लगाया 
काँटों सी चुभन मिली 

रो भी न सका अकेले 
रात पूनम निकली 

कहाँ सर छुपाऊं अब!
हर छत टपकन, गीली 

सीने की आग बरसों तक 
साँसों में दफ़न मिली

जब सहा न गया और,
तब जाके कलम चली

--
'हितैषी'

(04 नवम्बर 2012)

No comments:

Post a Comment