MyFreeCopyright.com Registered & Protected

Sunday, November 18, 2012

couplets

दौड़कर चलने वाले रुक कर फिर देखते कहाँ हैं!
अंधाधुंध सफलता में पाँव कभी संभलते कहाँ हैं!
--
'हितैषी'
(30 अक्टूबर 2012)


तेरा साथ देना हर क़दम मेरी ज़िंदगी की शान था...
फिर भी हाथ मेरा छोड़ जाना क्या इतना आसान था?!
--
'हितैषी'
(30 अक्टूबर 2012)



No comments:

Post a Comment