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Sunday, March 31, 2013

परवाह मत रखना

मैं तुमसे न मिलूँ तो मेरी परवाह मत रखना 
अनजान रास्तों से कोई शिकवा मत रखना 

गुज़रती हवा से हाल मेरा कभी जान जाओ तो 
अपने दिल में इस दिलजले को रुसवा मत रखना 

किसी और का जिस्म है तेरी बाँहों की मंज़िल 
मुझे चाहने की भूल भूलकर भी ज़िंदा मत रखना 

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'हितैषी'(10/12/2012)

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