सूनी आँखों में मेरी पुनः नमी-सी छाई है
............ बस तेरी स्मृतियों ने ली फिर अंगडाई है
भूल सकते तुझे तो लिखते आज नहीं रुबाई है
............ गए तुम हो, तेरी यादों ने नहीं ली विदाई है
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विकास प्रताप सिंह 'हितैषी'
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08/06/2012
............ बस तेरी स्मृतियों ने ली फिर अंगडाई है
भूल सकते तुझे तो लिखते आज नहीं रुबाई है
............ गए तुम हो, तेरी यादों ने नहीं ली विदाई है
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विकास प्रताप सिंह 'हितैषी'
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08/06/2012

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